भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय

Authors

  • डॉ. ओम प्रकाश यादव सहायक प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा, उत्तर प्रदेश Author
  • डॉ. राम जन्म यादव सहायक प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, समता पी.जी. कॉलेज सादात,गाजीपुर Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijeve.v2i2.34

Keywords:

भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक शिक्षा, समन्वित शिक्षा, मूल्यपरक शिक्षा, गुरु-शिष्य परंपरा, समग्र विकास

Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा हजारों वर्षों से विकसित एक समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है, जिसमें दर्शन, नैतिकता, आध्यात्मिकता, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, पर्यावरणीय चेतना तथा समग्र जीवन-दृष्टि का समावेश है। वर्तमान समय में आधुनिक शिक्षा प्रणाली वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। ऐसे परिदृश्य में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय अत्यंत आवश्यक हो जाता है, ताकि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रहकर व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का माध्यम बन सके।

यह अध्ययन भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख सिद्धांतोंजैसे गुरु-शिष्य परंपरा, नैतिक मूल्यों, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, समग्र जीवन-दृष्टि तथा अनुभवात्मक ज्ञानका विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करता है कि इन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली में किस प्रकार प्रभावी रूप से समाहित किया जा सकता है। साथ ही यह लेख आधुनिक शिक्षा में तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक कौशल के महत्व को भी रेखांकित करता है।

अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय शिक्षा को अधिक मानवीय, मूल्यपरक, व्यवहारिक और जीवनोपयोगी बना सकता है। यह समन्वय न केवल छात्रों के बौद्धिक विकास में सहायक होगा, बल्कि उनके नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को भी सुदृढ़ करेगा, जिससे एक संतुलित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण संभव होगा।

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Published

2026-02-28

How to Cite

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय. (2026). International Journal of Emerging Voices in Education, 2(2), 41-47. https://doi.org/10.59828/ijeve.v2i2.34