भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यक्तिगत शिक्षण के क्रियान्वयन की बाधाएँ

Authors

  • दीपक कुमार कटियार असिस्टेंट प्रोफेसर, बी.एड. विभाग, वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर Author
  • सुनील कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, पूज्य भाऊराव देवरस महाविद्यालय, कानपुर Author

Abstract

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज शिक्षा क्षेत्र में एक व्यापक परिवर्तन का आधार बनकर उभर रही है, जहाँ सीखने की प्रक्रिया पहले से अधिक व्यक्तिगत, संवेदनशील और छात्र-केंद्रित होती जा रही है। AI-सक्षम Personalized Learning प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत आवश्यकताओं, उसकी सीखने की गति, रुचियों और क्षमताओं को समझकर उसे उपयुक्त शिक्षण अनुभव प्रदान करती है। इस तकनीक का उद्देश्य मात्र शिक्षण को स्वचालित करना नहीं है बल्कि सीखने को एक मानवीय प्रक्रिया के रूप में अधिक अर्थपूर्ण और सुगम बनाना है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर विश्वविद्यालय AI को शैक्षिक नवाचार का महत्वपूर्ण उपकरण मान रहे हैं। लेकिन भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का परिदृश्य कुछ भिन्न है। यहाँ AI आधारित Personalized Learning का क्रियान्वयन कई स्तरों पर बाधाओं से घिरा हुआ है। तकनीकी दृष्टि से विश्वसनीय इंटरनेट, अद्यतन उपकरण और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना की कमी शिक्षण में AI के सहज उपयोग को सीमित करती है। आर्थिक रूप से भी अधिकांश संस्थानों के पास उन्नत AI प्लेटफॉर्म, उनके रख-रखाव और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। मानव संसाधन के संदर्भ में कई शिक्षकों के लिए AI अभी भी जटिल और अपरिचित अवधारणा है, जिसके कारण तकनीक अपनाने में हिचक और असुरक्षा दिखाई देती है। नीतिगत अस्पष्टता, नेतृत्व की कमी, विभागों के बीच समन्वय का अभाव तथा डेटा गोपनीयता जैसे नैतिक प्रश्न भी इस दिशा में गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं। यह शोध पत्र भारतीय संदर्भ में इन बाधाओं को समझने का प्रयास है और उच्च शिक्षा में AI आधारित Personalized Learning को मानवीय एवं प्रभावी रूप से लागू करने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर प्रकाश डालता है।

मुख्य शब्द - कृत्रिम बुद्धिमत्ता, Personalized Learning, डेटा गोपनीयता, मानव संसाधन 

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Published

2025-11-30

How to Cite

भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यक्तिगत शिक्षण के क्रियान्वयन की बाधाएँ. (2025). International Journal of Emerging Voices in Education, 1(3), 31-40. https://ijeve.com/index.php/ijeve/article/view/17