समावेशी शिक्षा में आई. सी. टी. (I.C.T) की भूमिका
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijeve.v1i1.5Abstract
समावेशी शिक्षा में आई.सी.टी. (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को व्यापक और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सुलभ बनाता है। आई.सी.टी. के माध्यम से विकलांग, वंचित, और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समान अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे उनकी समावेशिता सुनिश्चित होती है। इन उपकरणों जैसे स्क्रीन रीडर, ब्रेल डिस्प्ले, टाइप-टू-स्पीच, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्स और मल्टीमीडिया संसाधनों की मदद से शिक्षा सुलभ और प्रभावी बनती है (Sharma et al., 2011)। इन तकनीकों के प्रयोग से शिक्षण प्रक्रिया का मानकीकरण और व्यक्तिगतकरण संभव हो पाता है, जिससे प्रत्येक छात्र की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जा सकती है। साथ ही, डिजिटल साधनों के माध्यम से शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही अपने संसाधनों को घर से ही आसानता से एक्सेस कर सकते हैं। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होती है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया भी अधिक रोचक और इंटरैक्टिव बन जाती है। डिजिटल औजारों का प्रभावी उपयोग विविध सीखने की शैली को समर्थन प्रदान करता है तथा सामाजिक-विकास के साथ-साथ तकनीकी कौशल भी विकसित होता है। परन्तु, इन उपकरणों का समुचित प्रयोग ओर इन्हें अपनाने में तकनीकी और अवसंरचनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है (Kasinathan, 2018)। इन चुनौतियों का समाधान करने हेतु आवश्यक है कि नीति निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, और संसाधनों का विस्तार सुनिश्चित किया जाए। इस तरह, आई.सी.टी. समावेशी शिक्षा का आधार बनते हुए समाज में समावेशन और समानता के प्रति समर्पित रणनीतियों को सशक्त बनाता है। प्रभावी रणनीतियों एवं सतत प्रयासों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था का समावेशीकरण अधिक प्रभावी और विस्तारित हो सकता है, जिससे हर बच्चे को उनके गुणों के अनुसार सफलता पाने का अवसर मिले।
मुख्य शव्द : आई.सी.टी., समावेशी शिक्षा, ब्रेल डिस्प्ले, टाइप-टू-स्पीच, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, अदि ।
