शिक्षा और सतत विकास लक्ष्य (SDG 4): भारत की प्रगति का मूल्यांकन

लेखक

  • सुधीर कुमार राय सहायक प्राध्यापक, बी.एड. विभाग, स्वामी देवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मठ लार, देवरिया, उ.प्र. ##default.groups.name.author##

सार

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित किए गए वैश्विक लक्ष्यों का समूह है, जिसका उद्देश्य 2030 तक समावेशी, न्यायपूर्ण और टिकाऊ समाज का निर्माण करना है। इनमें से SDG 4 का लक्ष्य है: “सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना” (UNESCO, 2023)। भारत, जो विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, के लिए SDG 4 की प्राप्ति केवल अंतरराष्ट्रीय दायित्व नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक अनिवार्य कदम है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य भारत की शिक्षा-प्रगति का बहुआयामी मूल्यांकन करना है, जिसमें नामांकन, गुणवत्तापूर्ण सीखने के परिणाम, शिक्षक-शक्ति, बाल्यावस्था शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, और लैंगिक/सामाजिक समावेशन जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारत ने प्राथमिक नामांकन और शिक्षा-तक पहुँच के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है (NITI Aayog, 2024; Ministry of Education, 2023), किंतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सीखने के परिणाम और कौशल-प्रशिक्षण जैसे पहलुओं में अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं (ASER, 2023)। यह शोध-पत्र भारत की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य के लिए नीतिगत सुझावों को प्रस्तुत करता है।

प्रमुख शब्द (Keywords): सतत विकास लक्ष्य, समावेशी शिक्षा, कौशल, सामाजिक समावेशन, नामांकन.

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प्रकाशित

2025-09-25

अंक

खंड

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