समकालीन शिक्षा में अधिज्ञान: आयाम एवं शैक्षिक चुनौतियाँ

लेखक

  • डॉ. अरविंद सिंह सह-आचार्य, फीरोज गांधी कॉलेज रायबरेली, उत्तर प्रदेश सहयुक्त लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ##default.groups.name.author##
  • अमूल कुमार कन्नौजिया शोधार्थी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.59828/ijeve.v2i3.40

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अधिज्ञान, समकालीन शिक्षा, समालोचनात्मक चिंतन, शैक्षिक गुणवत्ता, शैक्षिक चुनौतियाँ ।

सार

अधिज्ञान का अर्थ है "अपने सोचने के तरीकों पर विचार करना" या "सोच के बारे में सोचना"। यह आत्म-जागरूकता की एक उच्च स्तरीय क्षमता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपनी विचार प्रक्रियाओं की समझ विकसित करता है, सीखने के तरीको का विश्लेषण करता है तथा अपनी शक्तियों व कमजोरियों का विश्लेषण करता है। अधिज्ञान की अवधारणा का प्रतिपादन मुख्यतः अमेरिकी विकासात्मक मनोवैज्ञानिक जॉन फ्लैवेल द्वारा 1970 के दशक में किया गया था। वर्तमान समय में अधिज्ञान शिक्षार्थियों की अधिगम क्षमता, समस्या-समाधान कौशल तथा आलोचनात्मक चिंतन के विकास में एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक संरचना के रूप में स्थापित हो चुका है। समकालीन शिक्षा व्यवस्था में अधिज्ञान के विविध पहलुओं, जैसे- आत्मनियंत्रण, आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन और आलोचनात्मक चिंतन, का गहन और सुव्यवस्थित अध्ययन आवश्यक है। इस सन्दर्भ में यह अध्ययन महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि अधिज्ञान न केवल शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाता है, बल्कि विद्यार्थियों को 21वीं सदी की शैक्षिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करने हेतु आवश्यक संज्ञानात्मक एवं अधिज्ञानात्मक दक्षताओं का विकास करेगा। प्रस्तुत अध्ययन एक अवधारणात्मक अध्ययन है, जिसमें अधिज्ञान के प्रमुख आयामों तथा समकालीन शिक्षा में इसके अनुप्रयोग और चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यदि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में अधिज्ञानात्मक रणनीतियों का समुचित समावेश किया जाए तो यह विद्यार्थियों की अधिगम गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर, चिंतनशील और आजीवन अधिगम के लिए सक्षम बनाया जा सकता है। परिणामत: यह कहा जा सकता है कि शिक्षा में अधिज्ञान का समुचित प्रयोग न केवल शैक्षिक गुणवत्ता को उन्नत करता है, बल्कि शिक्षार्थियों को आजीवन अधिगम के लिए सक्षम, आत्मनिर्भर एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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प्रकाशित

2026-03-30

अंक

खंड

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