महात्मा गांधी की शिक्षा-दृष्टि से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तक: समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा की बदलती अवधारणा
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https://doi.org/10.59828/ijeve.v2i7.70##semicolon##
महात्मा गांधी, नई तालीम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समग्र शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, कार्य-आधारित शिक्षा, मातृभाषा, मूल्य शिक्षा, कौशल शिक्षा, स्वावलंबनसार
भारतीय शिक्षा-विमर्श में महात्मा गांधी की नई तालीम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दो अलग ऐतिहासिक कालखंडों की शैक्षिक दृष्टियाँ हैं, फिर भी दोनों के बीच महत्त्वपूर्ण वैचारिक संवाद दिखाई देते हैं। गांधी ने शिक्षा को केवल साक्षरता अथवा रोजगार की तैयारी न मानकर शरीर, मन और आत्मा के संतुलित विकास, चरित्र-निर्माण, श्रम की प्रतिष्ठा, स्वावलंबन, मातृभाषा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा जीवन से जुड़ी सीखने की प्रक्रिया के रूप में देखा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी रटने पर आधारित अधिगम से आगे बढ़कर समग्र विकास, अनुभवात्मक अधिगम, बहुविषयकता, कौशल, कला एवं खेल-समेकित शिक्षण, स्थानीय ज्ञान, भारतीय भाषाओं, नैतिक एवं संवैधानिक मूल्यों तथा व्यावसायिक शिक्षा पर बल देती है। प्रस्तुत लेख दस्तावेजीय एवं व्याख्यात्मक पद्धति पर आधारित है और यह स्पष्ट करता है कि कार्य द्वारा सीखना, ज्ञान और जीवन का संबंध, स्थानीयता, स्वावलंबन, मूल्य-शिक्षा और शिक्षार्थी का बहुआयामी विकास दोनों दृष्टियों को जोड़ते हैं; किंतु डिजिटल साक्षरता, वैश्विक दक्षताओं, लचीले पाठ्यक्रम और बहुविषयक उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्र NEP 2020 की समकालीन आवश्यकताओं को व्यक्त करते हैं।
